धन-वापसी एवं रद्दीकरण नीति

शुल्क कब लौटता है, कब नहीं, और गड़बड़ हो तो क्या कीजिये।

पहले यह समझ लीजिये

यहाँ जो बेचा जाता है वह कोई वस्तु नहीं, पंचांग के पन्नों तक पहुँच है — और वह पहुँच भुगतान के उसी क्षण खुल जाती है। अर्थात् सेवा तुरन्त दे दी जाती है, आगे किसी दिन नहीं।

इसीलिये नीचे का नियम बना है। उसे पढ़कर ही सदस्यता लीजिये।

जो लौटाया जाता है

  • दो बार कट गया — एक ही सदस्यता का शुल्क दुबार कट जाए तो दूसरा पूरा लौटा दिया जाता है।
  • पैसा कटा पर सदस्यता नहीं खुली — पूरा लौटाया जाता है, अथवा आप कहें तो सदस्यता खोल दी जाती है। आपकी इच्छा।
  • हमारी ओर से सेवा न दी जा सकी — यदि किसी कारण से वह योजना आपको दी ही न जा सके, तो पूरा शुल्क लौटता है।

जो नहीं लौटाया जाता

  • सदस्यता खुल जाने और पन्ने देख लेने के बाद, केवल «मन बदल गया» कहने पर शुल्क नहीं लौटता — क्योंकि सेवा उसी क्षण दे दी गई थी।
  • अवधि के बीच में सदस्यता छोड़ देने पर शेष दिनों का भाग नहीं लौटता।
  • गणना का फल आपकी आशा के अनुकूल न निकला — यह धन-वापसी का कारण नहीं है। पंचांग शास्त्र के अनुसार गणना देता है, मनचाहा फल नहीं।
  • यदि नियम तोड़ने के कारण खाता बन्द किया गया हो।

रद्दीकरण

सदस्यता अपने-आप आगे नहीं बढ़ती, सो उसे «रोकने» की आवश्यकता ही नहीं — अवधि पूरी होने पर वह स्वयं समाप्त हो जाती है और कुछ नहीं कटता।

चलती सदस्यता आप कभी भी छोड़ सकते हैं; तब शेष दिनों की पहुँच समाप्त हो जाती है और शुल्क नहीं लौटता।

कैसे कहिये, और कितने में उत्तर मिलेगा

हमें लिखिये, और उसमें वह तिथि, राशि और भुगतान का क्रमांक अवश्य दीजिये जो आपको भुगतान के समय मिला था।

अनुरोध पर तीन कार्य-दिवस में उत्तर दिया जाता है। स्वीकृत होने पर पैसा उसी माध्यम से लौटता है जिससे आया था, और भुगतान-सेवा उसमें प्राय: पाँच से सात कार्य-दिवस लेती है।

सम्पर्क

नारायण विजय पंचांग — उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत।

भुगतान में कोई भी गड़बड़ हो तो रुकिये नहीं — तुरन्त लिखिये।

ईमेल — [email protected] · अथवा सम्पर्क फ़ॉर्म भरिये।

अन्तिम संशोधन — २३ अक्टूबर २०२६
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