व्रत एवं उपवास

प्रति मास तथा प्रति वर्ष आने वाले व्रत, उपवास एवं विशेष तिथियाँ
एकादशी
दोनों पक्षों की एकादशी — नाम सहित।
≈ 24 / वर्ष
द्वादशी — पारण
एकादशी का व्रत कब खोलें — हरिवासर बीतने के बाद, प्रातर्मुहूर्तत्रय के भीतर।
प्रत्येक एकादशी के अगले दिन
प्रदोष व्रत
शुक्ल व कृष्ण, दोनों पक्षों का प्रदोष — सूर्यास्त-व्यापिनी त्रयोदशी।
≈ 24 / वर्ष
संकष्टी चतुर्थी
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — चन्द्रोदय-व्यापिनी।
≈ 13 / वर्ष
पूर्णिमा
वर्ष-भर की पूर्णिमा तिथियाँ, नाम सहित।
≈ 12–13 / वर्ष
अमावस्या
वर्ष-भर की अमावस्या तिथियाँ।
≈ 12–13 / वर्ष
मासिक शिवरात्रि
प्रत्येक मास की कृष्ण चतुर्दशी — निशीथ-व्यापिनी।
≈ 12 / वर्ष
मासिक दुर्गाष्टमी
प्रत्येक मास की शुक्ल अष्टमी।
≈ 12 / वर्ष
मासिक कालाष्टमी
कृष्ण अष्टमी — प्रदोष से निर्णय।
≈ 12 / वर्ष
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
प्रत्येक मास की कृष्ण अष्टमी — निशीथ-व्यापिनी (ध.सिं. १०९)।
≈ 12 / वर्ष
स्कन्द (चम्पा) षष्ठी
मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी — तिथि-द्वैध हो तो पूर्वा।
1 / वर्ष
मासिक संक्रान्ति
सूर्य का राशि-प्रवेश — बारह संक्रान्तियाँ।
12 / वर्ष
श्राद्ध के दिन
पितृ पक्ष — प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से महालया अमावस्या तक।
15–16 दिन
गणेश चतुर्थी
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी।
1 / वर्ष
ये अभी नहीं बनेआ रहा है
चन्द्र दर्शनसत्यनारायण पूजामासिक कार्तिगाईइस्कॉन एकादशी
इनकी तिथि तो हमारे पास है, पर निर्णय का नियम किसी ग्रन्थ में नहीं मिला — अर्थात् प्रत्येक किस काल से तय हो (सूर्योदय, मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ अथवा चन्द्रोदय)। वही एक बात निश्चित होते ही ये भी जुड़ जाएँगे। अनुमान से जोड़ने पर व्रत गलत दिन बैठ सकता है, इसलिये रोका है।
व्रत का दिन कैसे तय होता है — तिथि सूर्योदय से सूर्योदय तक नहीं चलती; वह किसी भी घड़ी आरम्भ और समाप्त हो सकती है। इसीलिए हर व्रत का अपना नियम है — कोई सूर्योदय की तिथि से लिया जाता है, कोई मध्याह्न से, प्रदोष से अथवा चन्द्रोदय से। यही कारण है कि दो पंचांगों में कभी-कभी एक ही व्रत अलग-अलग दिन दिखता है।
पर्व एवं त्योहार · दैनिक पंचांग · श्राद्ध पक्ष
नारायण विजय पंचांग