दीपावली 2025 की सही तिथि: सूर्य सिद्धांत और धर्मशास्त्र पर आधारित निर्णय
आइए जानते है कब है पंचांग और धर्मशास्त्र के अनुसार दीपावली 2025 की तिथि, भारत की प्राचीन परंपरा में खगोल और ज्योतिष दोनों ही विज्ञान और धर्म का आधार हैं। प्राचीन काल से ही सूर्य सिद्धांत को सबसे प्रामाणिक खगोलीय ग्रंथ माना गया है। पंचांग गणना की अनेक पद्धतियाँ इसी पर आधारित हैं। कब है दीपावली 2025 की सही तिथि
| तिथि | अमावस्या स्थिति | प्रदोष व्यापिनी | मध्यरात्रि व्यापिनी | धर्मशास्त्रानुसार मान्यता | निष्कर्ष |
|---|---|---|---|---|---|
| 20 अक्टूबर 2025 | चतुर्दशी युक्त (दर्श अमावस्या) | ✅ हाँ | ✅ हाँ | ✅ धर्मसिंधु, स्कंदपुराण, जयसिंहकल्पद्रुम आदि | दीपावली के लिए श्रेष्ठ |
| 21 अक्टूबर 2025 | प्रतिपदा युक्त (कुहू अमावस्या) | ❌ नहीं | ❌ नहीं | ❌ किसी भी धर्मशास्त्र में मान्य नहीं | दीपावली हेतु अमान्य |
पंचांग गणना और वर्ष विभाजन
भारतीय ज्योतिष में चार प्रकार के वर्ष बताए गए हैं:
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चांद्र वर्ष – व्रत, पर्व और त्योहारों की तिथि निर्धारण हेतु
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सौर वर्ष – विवाह, गृहप्रवेश जैसे मुहूर्त हेतु
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सावन वर्ष – यज्ञादि हेतु
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बृहस्पति वर्ष – संवत्सर गणना हेतु
त्योहार मुख्यतः चांद्र वर्ष की तिथियों के अनुसार मनाए जाते हैं। उदाहरण स्वरूप दीपावली सदैव कार्तिक कृष्ण अमावस्या को ही आती है।
सूर्य सिद्धांत और पद्धतियाँ
सूर्य सिद्धांत में खगोलीय गणना के दो विशेष अंश हैं –
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मकरंद पद्धति
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गृहलगाव पद्धति
यही पद्धतियाँ प्राचीनकाल से प्रचलित हैं। वर्तमान समय में प्रयोग होने वाली “नई पद्धति” केवल 100–200 वर्ष पुरानी है जबकि सूर्य सिद्धांत की गणना अनादिकालीन परंपरा से चली आ रही है।
अमावस्या के भेद
धर्मशास्त्रों में अमावस्या तीन प्रकार की बताई गई है:
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सीनिवाली अमावस्या – प्रातःकाल से रात्रि तक रहने वाली।
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दर्श अमावस्या – चतुर्दशी संयुक्त एवं रात्रि पर्यंत रहने वाली।
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कुहू अमावस्या – प्रतिपदा संयुक्त।
धर्मग्रंथों में दीपावली के लिए “दर्श अमावस्या” का ही उल्लेख है।
दीपावली 2025 तिथि विवाद: 20 या 21 अक्टूबर?
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20 अक्टूबर 2025 → चतुर्दशी युक्त अमावस्या (दर्श अमावस्या), प्रदोष व्यापिनी एवं मध्यरात्रि व्यापिनी।
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21 अक्टूबर 2025 → प्रतिपदा युक्त अमावस्या, किन्तु प्रदोष और मध्यरात्रि व्यापिनी नहीं।
दीपावली 2025 की तिथि विवाद
पिछले कुछ वर्षों से पंचांगों में अमावस्या की तिथि को लेकर संशय देखा गया है। इसका कारण है:
- देश की भौगोलिक विविधता
- गणना की पद्धति (प्राचीन बनाम नवीन पद्धति)
उज्जैन की कालगणना अनुसार कब है दीपावली 2025 की सही तिथि :
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20 अक्टूबर को अमावस्या दोपहर 3:27 तक रहेगी। यह प्रदोष काल एवं मध्यरात्रि व्यापिनी भी है।
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21 अक्टूबर को अमावस्या शाम 4:35 तक रहेगी, लेकिन प्रदोष व्यापिनी नहीं होगी।
निष्कर्ष: दीपावली सदैव प्रदोष व मध्यरात्रि व्यापिनी अमावस्या पर ही होती है, अतः 2025 में दीपावली 20 अक्टूबर को ही मान्य है।
धर्मशास्त्र के प्रमाण अनुसार कब है दीपावली 2025 की सही तिथि ?
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धर्मसिंधु: प्रदोष व्यापिनी अमावस्या को ही दीपावली मानना चाहिए।
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जयसिंहकल्पद्रुम: प्रदोष एवं अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या श्रेष्ठ है।
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स्कंद पुराण: दीपावली अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या पर ही होती है।
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भविष्य पुराण, निर्णय सिंधु, कलातत्व विवेचन, तिथि निर्णय: सभी का यही मत है।
विशेष विधान – दीपावली की रात्रि
धर्मशास्त्रों में कहा गया है –
“अर्धरात्रे भ्रमत्येव लक्ष्मीराश्रयितुं गृहान्”
अर्थात दीपावली की अर्धरात्रि में माँ लक्ष्मी घर-घर भ्रमण करती हैं।
इसीलिए इस दिन रात्रि पूजन, जागरण एवं विशेष विधान है। प्राचीन परंपरा के अनुसार लगभग रात्रि 3:30 बजे “ब्रह्म मुहूर्त” में स्त्रियाँ घर की झाड़ू लगाकर दरिद्रता को बाहर करती हैं।

प्राचीन पंचांगों का निर्णय – कब है दीपावली 2025 की सही तिथि ?
भारत के प्रमुख और प्राचीन पंचांगों में भी दीपावली 2025 की तिथि 20 अक्टूबर ही दी गई है:
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नारायण विजय पंचांग – उज्जैन
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय पंचांग – काशी
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श्रृंगेरी पीठ पंचांग – कर्नाटक
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लाला रामस्वरूप रामनारायण पंचांग – जबलपुर
- दाते पंचांग – महाराष्ट्र
इन सभी में एक मत से दीपावली 20 अक्टूबर 2025 ही बताई गई है।
निष्कर्ष
दीपावली केवल “अमावस्या तिथि” नहीं है, बल्कि यह धर्मशास्त्र-आधारित प्रदोष एवं अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या का पर्व है।
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प्राचीन सूर्य सिद्धांत,
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अमावस्या के भेद,
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धर्मशास्त्र प्रमाण,
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तथा प्रचलित प्राचीन पंचांग
सभी इस बात की पुष्टि करते हैं कि दीपावली 2025 का पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाना उचित एवं शास्त्रसम्मत है।
लेखक: पं. अक्षत व्यास, ज्योतिषाचार्य पंचांगकर्ता– उज्जैन

